
Type 2 Diabetes के मरीजों के लिए ब्लड शुगर कंट्रोल करना जीवन का सबसे अहम हिस्सा होता है। ऐसे में कीटो डाइट (Keto Diet) हाल के वर्षों में एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभरी है। यह हाई फैट, मीडियम प्रोटीन और बेहद कम कार्बोहाइड्रेट पर आधारित एक विशेष आहार प्रणाली है, जो शरीर को कीटोसिस (Ketosis) की स्थिति में लाकर ब्लड शुगर को स्थिर करने में मदद करती है।
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कैसे काम करता है Keto Diet का मैकेनिज्म
Keto Diet में जब व्यक्ति कार्बोहाइड्रेट का सेवन लगभग शून्य कर देता है, तो शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की बजाय वसा को जलाना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में शरीर में कीटोन नामक यौगिक बनते हैं, जो मस्तिष्क और शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। टाइप 2 डायबिटीज़ में यह बदलाव विशेष रूप से उपयोगी होता है, क्योंकि यह इंसुलिन पर निर्भरता को कम करता है और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाता है।
ब्लड शुगर नियंत्रण में मददगार है Keto Diet
कई अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि कीटो डाइट अपनाने वाले टाइप 2 डायबिटीज़ मरीजों में फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। कम कार्बोहाइड्रेट के सेवन से शरीर में अचानक ब्लड शुगर स्पाइक्स नहीं होते, जिससे ग्लूकोज का स्तर संतुलित रहता है। इसके अलावा, वजन में कमी भी डायबिटीज़ नियंत्रण में सहायक होती है, जो कीटो डाइट के कारण आमतौर पर देखी जाती है।
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इंसुलिन प्रतिरोध को करता है कम
Type 2 Diabetes का एक प्रमुख कारण है इंसुलिन रेजिस्टेंस यानी जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं। कीटो डाइट इस प्रतिरोध को तोड़ने में कारगर साबित होती है। जब शरीर कम ग्लूकोज पर जीवित रहता है, तब इंसुलिन का स्तर भी स्थिर रहता है और शरीर धीरे-धीरे फिर से इंसुलिन के प्रति संवेदनशील बनता है, जिससे दवा की आवश्यकता कम हो सकती है।
लंबी अवधि में सतर्कता जरूरी
हालांकि कीटो डाइट के तत्काल फायदे स्पष्ट हैं, लेकिन इसे लंबे समय तक अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह बेहद जरूरी है। अत्यधिक वसा युक्त भोजन और कम फाइबर की वजह से किडनी, लिवर और हृदय पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह डाइट सभी के लिए अनुकूल नहीं होती, विशेषकर जिनकी स्वास्थ्य स्थिति जटिल हो। इसलिए डायबिटीज़ रोगियों को इस डाइट को अपनाने से पहले एक योग्य डायटीशियन या डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।
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