
अर्थराइटिस (Arthritis) के मरीजों की संख्या भारत में तेजी से बढ़ रही है, खासकर बढ़ती उम्र के साथ यह समस्या और गंभीर हो जाती है। जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न जैसी समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को काफी मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में कई लोग प्राकृतिक उपायों की ओर रुख करते हैं। इन्हीं उपायों में एक नाम है मेथी के दाने (Fenugreek Seeds)। आयुर्वेदिक मान्यताओं और हाल की स्टडीज़ के अनुसार, मेथी के दानों का नियमित और सही तरीके से सेवन अर्थराइटिस के दर्द में काफी राहत दे सकता है।
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मेथी के पोषक तत्व और शरीर पर प्रभाव

मेथी एक पारंपरिक मसाला है, जो भारतीय रसोई में आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसका महत्व केवल स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
भिगोई हुई मेथी का सेवन
रातभर पानी में भिगोकर रखे गए मेथी दानों को सुबह खाली पेट चबाकर खाने और साथ में वह पानी पीने से न केवल पाचन बेहतर होता है बल्कि जोड़ों की जकड़न भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
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विभिन्न रूपों में मेथी का सेवन कैसे करें
कुछ लोग मेथी को भूनकर पाउडर के रूप में भी सेवन करते हैं। इसे सब्जियों, दालों या फिर गुनगुने पानी में मिलाकर लिया जा सकता है। इसके अलावा, मेथी की चाय भी एक बेहतरीन उपाय है।
सावधानी और चिकित्सकीय सलाह क्यों है ज़रूरी
गठिया या अर्थराइटिस के मरीजों के लिए यह उपाय किसी वरदान से कम नहीं हो सकता, लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इसका सेवन नियमित और संतुलित मात्रा में ही किया जाए।
लहसुन और धनिया जैसे अन्य पूरक उपाय
जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए घरेलू उपायों में लहसुन और धनिया के बीज भी काफी कारगर माने जाते हैं। लहसुन में सल्फर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो कार्टिलेज की मरम्मत में मदद करते हैं।
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