
थाई और बैक फैट-Thigh and Back Fat न केवल शरीर की शेप को बिगाड़ता है, बल्कि यह आत्मविश्वास और चलने-फिरने की सहजता पर भी असर डालता है। जिम में घंटों पसीना बहाने के बावजूद अगर इन हिस्सों की चर्बी कम नहीं हो रही है, तो स्ट्रेचिंग एक स्मार्ट और असरदार विकल्प हो सकता है। खास बात ये है कि स्ट्रेचिंग से न सिर्फ मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि लचीलापन भी बढ़ता है जिससे शरीर फैट बर्निंग मोड में आता है।
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कैट-काउ स्ट्रेच-Cat-Cow Stretch

कैट-काउ स्ट्रेच एक योग आधारित व्यायाम है, जो पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है। यह स्ट्रेचिंग खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं और जिनकी पीठ पर फैट जमा हो गया है। इस स्ट्रेच को नियमित रूप से करने से लोअर बैक और अपर बैक दोनों क्षेत्रों में फैट कम होने लगता है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है।
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पिजन पोज-Pigeon Pose
थाई के अंदरूनी हिस्से में जमा फैट को कम करना आसान नहीं होता, लेकिन पिजन पोज इस काम को काफी हद तक आसान बना देता है। यह पोज हिप्स, ग्लूट्स और थाई मसल्स को खोलता है और वहां जमी हुई चर्बी को एक्टिव करता है। इसे करने से थाई क्षेत्र की टाइटनेस कम होती है, जिससे फैट बर्निंग आसान होती है। साथ ही, यह पोज मेंटल स्ट्रेस को भी कम करता है, जो हार्मोनल फैट बढ़ने का एक बड़ा कारण होता है।
साइड लंजेस-Side Lunges

अगर आप एक ऐसा स्ट्रेच चाहते हैं जो थाई के साथ-साथ बैक, हिप्स और ग्लूट्स को भी टोन करे, तो साइड लंजेस से बेहतर कुछ नहीं। यह स्ट्रेच थाई की अंदरूनी और बाहरी दोनों मांसपेशियों को एक्टिव करता है और लोअर बैक को सपोर्ट देता है। साथ ही यह फैट बर्निंग के साथ-साथ मसल टोनिंग भी करता है। दिन में सिर्फ 10 मिनट इस स्ट्रेच को देने से आप कुछ ही हफ्तों में फर्क महसूस कर सकते हैं।
स्ट्रेचिंग के साथ संतुलित जीवनशैली भी जरूरी
स्ट्रेचिंग तब ही असर दिखाएगी जब आप उसे एक संपूर्ण जीवनशैली के हिस्से के रूप में अपनाएंगे। संतुलित आहार, भरपूर नींद, हाइड्रेशन और स्ट्रेस फ्री लाइफस्टाइल स्ट्रेचिंग के असर को दोगुना कर सकते हैं। थाई और बैक फैट कम करने के लिए आपको धैर्य, निरंतरता और सही तकनीक की जरूरत होती है।