
थायरॉइड-Thyroid हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण एंडोक्राइन ग्रंथियों में से एक है, जो हार्मोनल संतुलन और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती, तो दो प्रमुख स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं—हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) और हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)। इन दोनों स्थितियों में सही डाइट एक बड़ा फर्क ला सकती है। आज हम एक ऐसा थायरॉइड डाइट प्लान साझा कर रहे हैं, जो मरीजों को हेल्दी बनाए रखने के साथ-साथ लक्षणों को भी नियंत्रण में रखता है।
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थायरॉइड के प्रकार और पोषण संबंधी ज़रूरतें
थायरॉइड के दो मुख्य प्रकार होते हैं: Hypothyroidism, जिसमें हार्मोन का उत्पादन कम होता है, और Hyperthyroidism, जिसमें हार्मोन अत्यधिक मात्रा में बनते हैं। हाइपोथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और वजन बढ़ने, थकान, मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके विपरीत हाइपरथायरायडिज्म में वजन कम होना, धड़कन तेज होना और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं। इन दोनों अवस्थाओं में डाइट को संतुलित बनाना बेहद जरूरी होता है।
हाइपोथायरायडिज्म में क्या खाएं
Hypothyroidism से जूझ रहे मरीजों के लिए आयोडीन, आयरन, सेलेनियम और जिंक जैसे पोषक तत्व बेहद अहम होते हैं। आयोडीन युक्त नमक, समुद्री मछली, केला और दही का सेवन थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में मदद करता है। आयरन पालक, किशमिश और अंडे की जर्दी से प्राप्त होता है, जिससे थकान और कमजोरी दूर होती है। सेलेनियम ब्राजील नट्स, अलसी बीज और सूरजमुखी बीज से मिलता है, जबकि जिंक के लिए तिल, राजमा और काजू फायदेमंद होते हैं।
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एक दिन की आदर्श डाइट
दिन की शुरुआत गुनगुने पानी और भीगे बादाम से करें ताकि पाचन तंत्र एक्टिव हो सके। नाश्ते में अंडे या बेसन का चीला लें। दोपहर में मल्टीग्रेन रोटी के साथ लौकी की सब्जी, दाल और दही एक बेहतरीन संयोजन होगा। शाम को हल्दी वाली चाय और मखाने या शकरकंद लें। रात में हल्का और सुपाच्य भोजन जैसे पालक की दाल और बाजरे की रोटी उपयुक्त होता है। दिन का अंत हल्दी मिले स्किम्ड दूध से करें जिससे नींद और हार्मोनल संतुलन बेहतर हो।
हाइपरथायरायडिज्म में क्या बदलें
Hyperthyroidism में आयोडीन की मात्रा सीमित करनी चाहिए क्योंकि यह थायरॉइड हार्मोन को और बढ़ा सकता है। ऐसे मरीजों को अधिक प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D की ज़रूरत होती है जो दूध, दही, हरी सब्जियों और अंडों से मिलती है। कैफीन और अल्कोहल से दूरी बनाना भी आवश्यक है क्योंकि ये लक्षणों को और गंभीर बना सकते हैं।
आवश्यक पोषण और आदतें
थायरॉइड रोगियों को केवल पोषण ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल में भी बदलाव लाना चाहिए। नियमित रूप से योग, ध्यान और हल्का व्यायाम थायरॉइड फंक्शन को नियंत्रित करता है। इसके साथ ही पर्याप्त नींद, तनाव से दूरी और समय पर भोजन भी बेहद महत्वपूर्ण है।
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