
वजन कम करना सिर्फ डाइट चार्ट फॉलो करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक समग्र जीवनशैली बदलाव की प्रक्रिया है। बहुत से लोग वजन घटाने के लिए अपने खाने-पीने में बदलाव तो करते हैं, लेकिन अगर अन्य आदतें जस की तस बनी रहती हैं, तो रिजल्ट आने में समय लगता है या बिल्कुल भी नहीं आता। मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखना, हार्मोनल बैलेंस बनाए रखना और शरीर को एक्टिव बनाए रखना ऐसे फैक्टर हैं जो डाइट से भी ज़्यादा असर डालते हैं।
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प्रोटीन युक्त भोजन से करें शुरुआत

अगर वजन घटाने की बात करें तो प्रोटीन का पर्याप्त सेवन आपके मेटाबॉलिज्म को तेज करने और भूख को नियंत्रित रखने में मदद करता है। प्रोटीन युक्त डाइट जैसे अंडा, दाल, दही, पनीर और नट्स आपके शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ फैट लॉस में भी सहायक होते हैं। जब आप हाई-प्रोटीन डाइट लेते हैं तो शरीर में थर्मोजेनिक इफेक्ट बढ़ता है, जिससे कैलोरी बर्निंग की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
मीठे और प्रोसेस्ड फूड्स से दूरी
शुगर और प्रोसेस्ड फूड्स वजन बढ़ने के सबसे बड़े कारणों में से एक हैं। यह न केवल अनावश्यक कैलोरी देते हैं, बल्कि इंसुलिन के स्तर को भी असंतुलित करते हैं जिससे फैट जमा होना शुरू हो जाता है। यदि आप वास्तव में Weight Loss को लेकर गंभीर हैं, तो चीनी वाले पेय, मिठाइयां और डिब्बाबंद स्नैक्स को अलविदा कहना ही बेहतर होगा।
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रोजाना व्यायाम

एक्टिव रहना, चाहे वह वॉकिंग हो, योग हो या कोई भी कार्डियो एक्टिविटी—आपके वजन घटाने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक्सरसाइज शरीर की ऊर्जा खपत को बढ़ाती है, जिससे न केवल मौजूदा फैट घटता है, बल्कि मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। साथ ही, यह मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है जो लंबे समय तक फैट लॉस को बनाए रखने में मदद करती है।
तनाव से निपटने के तरीके अपनाएं
तनाव एक ऐसा कारक है जो वजन घटाने में सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है। स्ट्रेस के समय Cortisol नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो शरीर में फैट स्टोर करने की प्रक्रिया को तेज करता है। साथ ही, इससे इमोशनल ईटिंग यानी मूड खराब होने पर खाना खाने की आदत भी बनती है। मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और समय पर ब्रेक लेने जैसी आदतें स्ट्रेस मैनेजमेंट में बेहद मददगार हो सकती हैं।
नींद की गुणवत्ता

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, लेकिन पर्याप्त और अच्छी नींद नहीं लेते, तो यह आपकी पूरी मेहनत को निष्फल कर सकता है। नींद की कमी से लेप्टिन और घ्रेलिन जैसे हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं जो भूख को नियंत्रित करते हैं। इसलिए हर रात कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद जरूरी है।
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