
तेज़ रफ्तार जीवनशैली, लगातार स्क्रीन टाइम और पौष्टिक भोजन की कमी के चलते आजकल युवा से लेकर बुज़ुर्ग तक आंखों की रोशनी में गिरावट की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि आंखों की देखभाल के लिए बाजार में कई दवाएं और लेंस उपलब्ध हैं, लेकिन आयुर्वेदिक उपायों से बिना किसी साइड इफेक्ट के प्राकृतिक रूप से दृष्टि को बेहतर किया जा सकता है। यह न केवल सस्ता समाधान है, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ भी होता है।
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त्रिफला और आंवला

त्रिफला, जो आंवला, हरड़ और बहेड़ा से मिलकर बनता है, आयुर्वेद में आंखों की सफाई और पोषण के लिए जाना जाता है। त्रिफला के पानी से आंखें धोने से न केवल सूजन कम होती है बल्कि आंखों की नमी और चमक भी बढ़ती है। वहीं आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है, जो आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और रोशनी को प्राकृतिक रूप से बढ़ाता है। रोजाना आंवला जूस का सेवन या सूखा आंवला पाउडर शहद के साथ लेने से चमत्कारी लाभ मिल सकता है।
सौंफ-बादाम-मिश्री

यह आयुर्वेदिक मिश्रण आंखों के लिए एक शक्तिशाली पोषक कॉम्बिनेशन है। सौंफ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, बादाम के ओमेगा-3 फैटी एसिड और मिश्री की शीतलता आंखों को भीतर से राहत देते हैं। रोज रात को इसका एक चम्मच गर्म दूध के साथ सेवन आंखों की कमजोरी दूर करने में कारगर माना गया है।
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योग और प्राणायाम से बढ़ाएं Eye Power

योग में ‘त्राटक’ और प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम न केवल आंखों की नसों में रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दिमाग को शांत करके देखने की क्षमता को भी सशक्त करते हैं। साथ ही नेत्र तर्पण जैसे विशेष आयुर्वेदिक उपचार से आंखों में ठंडक पहुंचती है और दृष्टि सुधारने में मदद मिलती है।
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