
थायराइड-Thyroid एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है। यह एक प्रकार का लाइफस्टाइल डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रणाली बुरी तरह प्रभावित होती है। गर्दन में स्थित एंडोक्राइन ग्लैंड, जो थायराइड हार्मोन (T3 और T4) का उत्पादन करता है, जब ठीक से काम नहीं करता, तो स्वास्थ्य पर इसका व्यापक असर देखने को मिलता है।
थायराइड हार्मोन शरीर में ऊर्जा उपयोग, हृदय गति, पाचन और मेटाबॉलिज्म जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यदि यह हार्मोन कम या अधिक मात्रा में बनता है, तो हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति बनती है, जिससे थकान, वज़न बढ़ना, गर्भधारण में समस्या, और हृदय व शुगर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
महिलाओं में थायराइड का बढ़ता खतरा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट बताती है कि दक्षिण भारत में हर आठ में से एक युवा महिला थायरॉयड डिसफंक्शन से पीड़ित है। यह पुरुषों की तुलना में 11.4% अधिक है। उम्र बढ़ने के साथ सबक्लीनिकल हाइपोथायरायडिज्म का खतरा भी बढ़ता जाता है। इस समस्या की पहचान और समय पर इलाज ज़रूरी है, वरना यह कई अंगों को प्रभावित कर सकती है।
थायराइड हार्मोन की कमी से सेहत पर प्रभाव
थायराइड हार्मोन की गड़बड़ी से शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली में बाधा आती है। यह हृदय, वज़न, प्रजनन प्रणाली, रक्त शर्करा और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसका असर कैसे पड़ता है।
1. हृदय पर असर (Thyroid effect on heart)
थायराइड हार्मोन की कमी से दिल की धड़कन धीमी हो जाती है और ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट आती है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और धमनियों की लचीलापन कम हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ सकता है।
2. प्रजनन क्षमता में कमी (Thyroid effect on fertility)
हाइपोथायरायडिज्म महिलाओं में मासिक धर्म अनियमित करता है और गर्भधारण की संभावना को घटाता है। वहीं हाइपरथायरायडिज्म समय से पहले मेनोपॉज़, गर्भपात और हार्मोन असंतुलन का कारण बनता है।
3. डायबिटीज का खतरा (Thyroid effect on blood sugar)
थायराइड हार्मोन की गड़बड़ी कार्बोहाइड्रेट मेटाबॉलिज्म और पैंक्रियाज के कामकाज को प्रभावित करती है। इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित नहीं रह पाता और डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है।
4. वज़न में वृद्धि (Thyroid effect on weight)
थायराइड हार्मोन की कमी से शरीर की डाइजेशन क्षमता घटती है और कैलोरी फैट में बदल जाती है। इससे शरीर में चर्बी जमा होने लगती है और व्यक्ति वज़न बढ़ने की समस्या से जूझता है।
5. प्रेगनेंसी पर असर (Thyroid effect on pregnancy)
प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनों में थायराइड जांच ज़रूरी होती है। इसका कम स्तर भ्रूण के मानसिक विकास को प्रभावित करता है और नर्वस सिस्टम में समस्याएं पैदा करता है। यह मिसकैरेज का कारण भी बन सकता है।
थायराइड से राहत पाने के प्रभावी उपाय (How to balance your thyroid level)
नियमित व्यायाम: व्यायाम से मेटाबॉलिज्म तेज होता है, शरीर में जमा फैट घटता है और ऊर्जा का स्तर बना रहता है। वेट ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट विशेष रूप से महिलाओं के लिए लाभकारी हैं।
संतुलित डाइट: आयोडाइज्ड नमक का सेवन करें, गोभी और फूलगोभी जैसे गोइट्रोजन युक्त सब्ज़ियों का सीमित उपयोग करें। मौसमी फल, साबुत अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें।
दवाइयों का सेवन और रेगुलर चेकअप: डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन करें और हर 3 से 6 महीने में थायराइड लेवल की जांच करवाएं।
कैफीन और स्मोकिंग से परहेज: कैफीन और सिगरेट से शरीर में थायराइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित होता है। थायोसाइनेट कंपाउंड आयोडीन को अवशोषित होने से रोकता है, जिससे समस्या और बढ़ती है।