
पेट खराब है, गैस और एसिडिटी ने दिन बिगाड़ रखा है, तो त्रिफला आपके लिए एक प्राकृतिक समाधान हो सकता है। त्रिफला तीन फलों—आंवला, हरीतकी और बिभीतकी—का मिश्रण है, जो आयुर्वेद में पाचन शक्ति सुधारने और आंतों की सफाई के लिए वर्षों से इस्तेमाल होता आ रहा है। रात को एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से कब्ज में राहत मिलती है और पेट हल्का महसूस होता है।
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अजवाइन और सौंफ

खाने के बाद अगर पेट फूल रहा है या गैस बन रही है, तो अजवाइन और सौंफ का सेवन आपके लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। अजवाइन में मौजूद थाइमोल तत्व पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाता है और गैस के गुब्बार को शांत करता है। वहीं सौंफ पेट की सूजन और जलन को कम करती है। इन दोनों का सेवन भोजन के बाद किया जाए तो पेट में तुरंत राहत मिलती है और डाइजेशन भी बेहतर होता है।
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जीरा पानी

जीरा पानी एक पुराना लेकिन कारगर घरेलू उपाय है जो एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं से निजात दिलाता है। एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबालें और उसे ठंडा करके पिएं। यह न सिर्फ पेट की जलन को शांत करता है बल्कि गैस्ट्रिक जूस का संतुलन भी बनाए रखता है। लगातार 2-3 दिन सेवन करने से पेट से जुड़ी समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है।
आयुर्वेदिक उपायों की सबसे बड़ी खासियत है उनका प्राकृतिक और बिना साइड इफेक्ट वाला असर। त्रिफला, अजवाइन-सौंफ और जीरा पानी जैसे उपाय पेट की सामान्य गड़बड़ियों में तुरंत राहत देते हैं। अगर पेट खराब है और आपको बार-बार गैस, जलन या अपच की दिक्कत होती है, तो इन उपायों को अपनाकर आप दवाओं पर निर्भरता कम कर सकते हैं।
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