
यूरिन बार-बार आना या पेशाब करते समय जलन महसूस होना आम समस्या है, जो कई बार हमारी दिनचर्या और जीवनशैली को बाधित कर देती है। यह समस्या अक्सर डिहाइड्रेशन, मूत्र मार्ग संक्रमण (Urinary Tract Infection), ब्लैडर इंफ्लेमेशन या यहां तक कि डायबिटीज जैसी गंभीर स्थितियों का संकेत भी हो सकती है। हालांकि हर बार यह गंभीर कारणों से नहीं होती, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है।
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यूटीआई-UTI के लक्षणों से राहत

बार-बार पेशाब आना, जलन होना, पेशाब का रंग गहरा होना और बदबू आना मूत्र मार्ग संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय आपको बिना दवा के भी तत्काल राहत दे सकते हैं। नारियल पानी, नींबू पानी और सेब के सिरके का सेवन यूरिन को साफ करने में मदद करता है। साथ ही दही, खीरा और अदरक जैसे प्राकृतिक स्रोत संक्रमण से लड़ने में सहायक माने जाते हैं।
पर्याप्त पानी पीना है सबसे जरूरी उपाय
शरीर में पानी की कमी पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने के पीछे एक बड़ी वजह हो सकती है। जब हम पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो विषाक्त पदार्थ मूत्र मार्ग में जमा हो जाते हैं, जिससे जलन और दर्द शुरू होता है। कम से कम 8-10 गिलास पानी रोज पीना इस समस्या से बचने का सबसे सरल लेकिन प्रभावी तरीका है।
नारियल पानी और खीरा

नारियल पानी में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को न केवल हाइड्रेट करते हैं बल्कि ब्लैडर की सफाई में भी सहायक होते हैं। वहीं खीरा, जो पानी का बेहतरीन स्रोत है, मूत्र मार्ग को ठंडक पहुंचाकर जलन से राहत दिलाता है। खीरे का रस पीना या उसे कच्चा खाना मूत्र संबंधित परेशानियों में बहुत मदद करता है।
नींबू और सेब का सिरका
गुनगुने पानी में नींबू का रस मिलाकर पीने से मूत्र मार्ग का पीएच संतुलित होता है, जो बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है। इसी तरह सेब का सिरका, जो एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, संक्रमण की जड़ तक जाकर उसे खत्म करने का कार्य करता है। यह नुस्खा शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है।
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कैफीन और मसालेदार चीजों से करें परहेज

अगर आप बार-बार पेशाब आने की या जलन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो कैफीनयुक्त पेय, मसालेदार भोजन और अत्यधिक नमक वाले स्नैक्स से दूरी बनाना जरूरी है। ये सभी पदार्थ ब्लैडर को उत्तेजित करते हैं, जिससे पेशाब की बारंबारता और जलन की समस्या बढ़ सकती है।
दही और अदरक
दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लड़ने की क्षमता देते हैं। वहीं अदरक, जिसका उपयोग आयुर्वेद में भी किया जाता रहा है, शरीर की सूजन कम करता है और दर्द से राहत देता है। अदरक की चाय या काढ़ा इन लक्षणों में आराम देता है।
साफ-सफाई और हाइजीन का रखें ध्यान

अक्सर मूत्र संक्रमण का कारण पर्याप्त हाइजीन न रखना होता है। जननांग क्षेत्र की साफ-सफाई पर ध्यान देना, पेशाब रोकने से बचना और यौन संबंधों के बाद स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है। स्वच्छता ही एक मजबूत बचाव कवच है जो संक्रमण को शुरू ही नहीं होने देता।
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